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पारसी भारत का शाँतिप्रिय संप्रदाय है जहाँ के लोग मूलतः गुजरात के निवासी होते हैं। वे मूलतः परशिया के हैं, जो आज ईरान के नाम से जाना जाता है। वे भोजन प्रेमी होते हैं और भोज के लिए खाना बनाने में समय बिताते हैं। समय के गुज़रने के साथ वे अपने पाकशैली की तकनीक वहाँ के प्राँतीय लोगों के साथ जोड़ने लगे और इस तरह परशियन और भारतीय पाकशैली के मिश्रित रूप का उद्भव हुआ। पारसी खाद्द में पश्चिमी स्वादिष्ट पाकशैली का प्रभाव है, गुजराती मीठा और खट्टा का मिश्रण वे पसंद करते हैं, तो परशियनविज्ञ मीट के साथ सूखा फल जैसे खुबानी मिलाकर बनाने में सिद्धहस्त होते हैं।

पारसी पाकशैली भारतीय पाकशैली को विविधता और मधुरता प्रदान करता है। पारसी खाद्द शाकाहारी गुजराती पाकशैली और माँसाहारी ईरानियन पाकशैली का मिश्रित रूप है। फिर भी, माँसाहारी व्यंजन को ही इस पाकशैली में प्रधानता है।

पारसी खाद्द विशिष्ट महक और सादे स्वाद के लिए जाना जाता है। वे व्यंजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए मसालों का अच्छी तरह इस्तेमाल करते हैं। अलग-अलग मसाले एक साथ मिलकर अद्वितीय स्वाद और महक पारसी पाकशैली को प्रदान करते हैं। भारतीय हर्ब्स और मसालों में अदरक, लहसुन और प्याज़ का साधारणतः इस्तेमाल किया जाता है। खाद्द ज़्यादा मसालेदार और तैलीय नहीं होता है, पेट के लिए हल्का होता है।

इसके अलावा, पारसी पाकशैली पौष्टिक डाएट होता है जिसको उन सामग्रियों के साथ पकाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। कई रेसिपियों के स्वाद और महक को बढ़ाने के लिए ड्राई फ्रूट, गुलाब जल और केसर का ज़्यादातर इस्तेमाल किया जाता है। पारसी के व्यंजनों में अनार और खजूर का प्रधानतः इस्तेमाल किया जाता है।

चावल प्रधान खाद्द होता है जिसको दाल और करी के साथ दिया जाता है। इस तरह के खाद्द में रस बहुत लोकप्रिय होता है। रस और करी में अंतर होता है। जब करी को बनाने में नारियल का इस्तेमाल किया जाता है, तब रस में नारियल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और करी की तुलना में तरल रूप में होता है|

मीट प्रधान खाद्द होता है और चिकन और मीट का व्यंजन पकाने में ईरान का पूर्ण रूप से प्रभाव प्रतिबिम्बित होता है। वे बहुत सारे मसालों और सब्ज़ियों के साथ मीट को पकाना पसंद करते हैं। अंडा एडा या एडो कहलाता है जो पाकशैली का महत्वपूर्ण अंग होता है। पारसी किसी भी व्यंजन के ऊपर अंडे को फोड़कर डाल देते हैं और खाते हैं। हर मील में वे अंडा खाते हैं - नाश्ता, लंच और डिनर तीनों में। पारसी पाकशैली का सबसे महत्वपूर्ण और विशिष्ट अंग सलाद होता है। इसको कचुम्बर कहते हैं और इसको प्याज़ और खीरे के साथ बनाया जाता है। सामग्रियों को बारीक काट लिया जाता है और दूसरे पारसी व्यंजनों को साथ उत्साह के साथ खाया जाता है।

अद्वितीय रेसिपियों का असामान्य इतिहास

उसके इतिहास से ही पारसी पाकशैली को आकार मिलता है। प्राचीन परशिया और गुजरात पाकशैली का मेलबंधन भाग्यवश घटना है। पारसी अपने साथ अद्वितीय रेसिपी और तकनीक भारत लाए थे।

दंतकथाओं के अनुसार 10‍वीं शताब्दी ए.डी. में ज़ोरोस्ट्रियन्स् ने गुजरात के तट पर छोटे गाँव सांजन में आश्रय लेने की अनुमति के लिए वहाँ के स्थानीय शासक के पास अपना दूत को भेज था। वहाँ के स्थानीय राजा यादव राना ने एक ग्लास दूध भरकर भेजा यह इशारा करने के लिए के यहाँ समृद्धि भरपूर है, रहने का स्थान नहीं है। लेकिन शरणार्थी के नेता बहुत बुद्धिमान थे। उन्होंने उसी दूध के ऊपर एक चुटकी चीनी छिड़क कर वापिस भेजा यह संकेत के साथ कि उनका संप्रदाय मधुरता और स्वाद ही प्रदान करेगा बिना कोई रंग या रूप को बदले। साथ ही उनके संस्कृति के साथ वे घुलमिल जायेंगे। इस प्रदर्शन से वहाँ के राजा खुश हो गये और गुजरातियों ने जोरोस्ट्रियनों को अनुमति दे दी और समय के साथ वे पारसी के नाम से जाने गये।

ये लोग गुजरात के समुद्रतट पर रहने लगे, न सिर्फ उन्होंने भाषा और साड़ी को अपनाया बल्कि पाकशैली के तकनीक और सामग्रियों को भी अपनाया और दाल और सीरियल भी खाने लगे। उन्होंने भारतीय पाकशैली को अपने खाद्द के संस्कृति में अपनाया और उन्होंने एक नये खाद्द संस्कृति का आविष्कार किया। व्यंजन में अनेक नट, ड्राई फ्रूट मिलाकर मीठे स्वाद का राज़ खोलने लगे और उसके साथ अदरक, लहसुन और प्याज़ को डालकर भारतीय प्रभाव को भी दर्शाने लगे जो व्यंजन को स्वादिष्ट और नमकीन तो बनाते हैं लेकिन मसालेदार नहीं बनाते हैं।

हल्का परशियन पुलाव ने स्थानीय मसालों को लेकर एक रूपांतर प्रस्तुत किया। बकलावा को नट स्टफ करके परतदार मलाई खाजास के साथ गुलाब-जल महक वाला क्रीम डालकर एक रूपांतर प्रस्तुत किया गया। दाल और मीट का ईरानी व्यंजन का रूपांतर गुजराती मसाला और सब्ज़ियाँ डालकर बदला गया। इससे एक सुंदर सब्ज़ी और मटन के साथ दाल बनाया गया और जले हुए चीनी के साथ पके हुए चावल के साथ परोसा गया। इस तरह लोकप्रिय धनसक पारसी खाद्द सबके समक्ष आया।

बाद में पारसी लोग मुम्बई आ गये और महाराष्ट्र और गोवा के तकनीक को भी अपना लिया। गोवा के पाकशैली से प्रभावित होकर कोकम और नारियल का इस्तेमाल पारसी पाकशैली में होने लगा। उन्होंने महाराष्ट्रियन व्यंजन पूरनपोली को ग्रहण करके ‘दाल नी पोरी’ बनाया। कुछ ही सालों में पश्चिमी पाकशैली के साथ दूसरे पाकशैली को भी वे अपनाने लगे।

असामान्य ऐतिहासिक परिदृश्य पारसी खाद्द को अद्वितीय स्वाद प्रदान करता है। आज के पाकशैली में भारतीय पाकशैली का प्रभाव दृष्टीगोचर होता है। कई सालों से परिवर्तन दिख रहा है - शाकाहारी पारसियों के आगमन, विवाह के अवसर पर पत्रास का रूपांतरण हुआ सलाद काउंटर में, और दस्ताने वेटर जो मछली को केले के पत्ते के रैप मैं से निकलते है ।

परम्परागत पारसी व्यंजन

पारसी व्यंजन मुँह में पानी आनेवाले स्वादिष्ट व्यंजन के लिए मशहूर है। सारे शाकाहारी और माँसाहारी व्यंजन पारसी मेनू में पाये जाते हैं:

•  धनसक: मशहूर धनसक गुजराती खाद्द से प्रभावित है। यह पारसी व्यंजनों में एक है और संडे लंच में सबको प्रिय होता है। साधारणतः मटन से बनाया जाता है, दाल, सब्ज़ी, मसाला, जीरा, अदरक और लहसुन एक साथ मिलाकर पसंदीदा मीट के साथ या दूधी या कद्दु के साथ भी बनाया जाता है। शाकाहारी मीट के बिना भी पकाते हैं। मीठा, गाढ़ा, दाल का स्टू सब्ज़ी के साथ गाढ़ा करके मीट या चिकन के साथ धीरे-धीरे पकाया जाता है। जब पकता है, तब धीरे-धीरे पकाया जाता है। जब पकता है, तब तरह-तरह की समाग्रियों से एक अद्भुत महक निकलने लगता है और यह सभी एक दूसरे के सही पूरक होते हैं। स्टू हल्का भूरा केरमलाइज़्ड चावल के साथ परोसा जा सकता है और जो सलाद के बारीक टुकड़ों, जिसे कचुम्बर कहते हैं के साथ भी खाया जाता है।

हर घर में अलग-अलग तरह से इस व्यंजन को बनाया जाता है और बहुत लोग इस विशेष धनसक मसाले को राज़ रखते हैं। विभिन्न तरह की सब्ज़ियों, मसाले और फ्लेवर का सही संतुलन होना चाहिए, नहीं तो थोड़ी-सी भी गलती पूरे व्यंजन को बरबाद कर देती है।

•  पात्रा नी मच्छी: इसका मतलब है ‘मछली को पत्तों में लपेटकर’। यह परम्परागत पारसी व्यंजन शादी के अवसर पर परोसा जाता है। मछली का टुकड़ा, पुदीना, नारियल, धनिया, नींबु का रस और हरी मिर्च के चटनी से ढककर कलापूर्ण तरीके से केले के पत्तों में रैप करके भाप में पकाया जाता है ताकि महक को सोख ले।

•अंडा: मसालेदार अंडे की भूर्जी अकूरी नाश्ते का व्यंजन है। यह पारसियों का विशेष तरह का व्यंजन घी से भरपूर मोटी रोटी के साथ ज़्यादा अच्छा लगता है। इसके अलावा टोमाटो पर एडो (टमाटर के ऊपर अंडा), पोरा (पारसी ऑमलेट) भी होता है। यहाँ तक कि प्रधान व्यंजन के ऊपर भी अंडा रख कर परोसा जाता है।

•सल्ली बोटी/मरघी: यह व्यंजन हड्डी रहित मटन (बोटी) या चिकन (मरघी) के साथ प्याज़ और टोमाटो ग्रेवी के साथ और ख़ुबानी के साथ पकाया जाता है, और ऊपर कुरकुरा आलू का स्ट्रिप डाला जाता है।

•मरघी ना फारचा: परम्परागत रूप से फारचा चिकन का बड़ा टुकड़ा होता है, जिसको बैटर लगाकर टुकड़ा करके और फ्राई करके बनाया जाता है।

•दूसरे विशेष रेसिपियाँ
अपने रेसिपियों को अद्वितीय बनाने के लिए पारसी बहुत तरह के सामग्रियों का इस्तेमाल करते हैं। भूजन का गुजराती मतलब है बेक किया हुआ, बकरी के यकृत, वृक्क, प्लीहा और वीर्यकोष के टुकड़ों से बनाते है जिसको रातभर दही में मैरिनेड करके रखा जाता है और फिर मसालों को डाल कर लकड़ी और चारकोल पर रख कर ग्रिल किया जाता है, ज़्यादातर बेक से ही बनता है।

खुरचंद भी भुजन की तरह ही है, लेकिन धीरे-धीरे मसालेदार ग्रेवी और हरी मिर्च में गरम मसाला के साथ पकाया जाता है। केले के पत्ते पर मशहूर घी नी गागरती, गहूं नी रोटी और थोड़ा गोर केरी नु अचार के साथ परोसा जाता है। अगर आप भूना हुआ आलू और उबले हुए अंडे के टुकड़ों, किशमिश या मीट के बॉल खुरचंद में डालेंगे तो अलेती पलेती पायेंगे।

एक सादा और मुलायम व्यंजन जिसे खिचड़ी (चावल के साथ तुअर दाल और मूंग दाल) कहते हैं। इसका स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह हल्का व्यंजन थोड़े से मसालों और तेल के साथ पकाया जाता है और पेट के गड़बड़ी को ठीक करता है और कमजोर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। मटन पुलाव दाल सभी खुशी के अवसरों के लिए बनाया जाता है और परिवार जनों के एकत्र होने के अवसर पर भी पकाया जाता है। इस रेसिपी के अलावा सास नी मच्छी (पीले चावल के साथ पॉमफ्रेट मछली के फिले में सफेद सास), लगन नो सास (सफेद सास में मछली), मच्छी न पातियों (एक मीठा और खट्टा सीफूड रेसिपी, जो पॉमफ्रेट को बनाने में इस्तेमाल होता है) और मूंग नी दाल ने पपेटा (मूंग दाल और आलू मसालेदार मसाला में पकाया जाता है)।

• स्नैक्स
स्नैक्स में मशहूर है पात्रेल। अर्बी के पत्तों के ऊपर मसाला, मीठा और खट्टा पेस्ट फैलाया जाता है। पत्तों को सिद्धहस्त से एक साथ पैक किया जाता है और रोल किया जाता है। टुकड़ों को पतला-पतला इस तरह काटा जाता है कि पात्रेल के छल्लों को देखा जा सके। फिर उनको डीप फ्राई करके स्नैक्स के रूप में परोसा जाता है।

दूसरी रोचक चीज़ है पोपटजी। यह नाम तोते के आकार की तरह होने के कारण दी गई है। अच्छा पोपटजी हल्का और पक्षी के पर की तरह हल्का जीभ पर महसूस होता है। डीप फ्राई नहीं किया जाता है और बहुत बड़े आकार में भी नहीं होता है।

भाकरा (फ्राईड स्कोन की तरह होता है), बतासा (आटा और बटर टी बिस्किट) है और खमड़ न लावदा (मीठा नारियल मालपुआ में स्टफ किया हुआ) यह सब दूसरे लोकप्रिय स्नैक्स है जो इस खाद्द संस्कृति से ही हैं।

• अचार
गुजराती अचार पसंद करते हैं, जो पारसी व्यंजन में भी दृष्टिगोचर होता है। मशहूर अचारों में मेथियाँ नु अचार, लगन नु अचार, गाजर मेवा नु अचार (गाजर और ड्राइड फ्रूट अचार), बाफेनु अल्फ़ानसो आम और विनेगर से बनता है और ड्राई बॉम्बे डक पिकल आदि नाम हैं।

साधारण डेज़र्ट

पारसी लोग सादा मीठा पसंद करते हैं। वे सेवई पसंद करते हैं, जो दूध और ड्राई फ्रूट से बनता है। मशहूर डेज़र्ट में-

•लगन नु कस्टर्ड: परशियन में उद्भव हुआ है और अपने नाम के अनुसार शादी के अवसर पर परोसा जाता है। दूसरे कस्टर्ड की तरह गाढ़ा होता है और इसलिए दूध को जलने दिया जाता है। इसमें खोया, नट, चिरौंजी, किशमिश, ताज़े गुलाब की पंखुड़ियाँ, बदाम, व्हाईट शुगर भरपूर मात्रा में और अंडा रहता है। यह पारसी शादी के थाली में विशेष रूप से रहता है।

•दाल नी पोरी: मीठे दाल से टूटी फ्रूटी और ड्राइ फ्रूट से स्टफ किया पेस्ट्री रहता है। तुअर दाल को उबालकर गाढ़ा किया जाता है, मैदे को गूंदकर, रोल करके, घी से भरकर मोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया 20-30 बार तक दोहराई जाती है। दाल नी पोरी को विशेष अवसरों पर परोसा जाता है। शादी के अवसर पर रिवाज़ है कि 5-7 दाल नी पोरी दुल्हन के घर से दुल्हे के घर में भेजा जाता है।

वासानु: वासानु मसालेदार, मीठा जाड़े का व्यंजन है जो केला, नट, ड्राईड फ्रूट, बहुत सारे घी और शुगर से बनाया जाता है।

•मालिडो: यह मांगलिक अवसर पर बनता है। यह मीठा दूध से बना डेज़र्ट है जो सीरियल, नट और अंडा से बनता है। अद्वितीय पारसी ब्रेड जिसे पापड़ी कहते हैं, के साथ खाया जाता है, मालिडो के अंतर्निहित स्वाद को पापड़ी निखारता है।

दूध न पफ: यह नाश्ता का अनोखा खाद्द है। ताज़ा, होल मिल्क को सूती के कपड़े से ढक दिया जाता है और रात को ओस में छोड़ दिया जाता है। फिर सुबह फेंटकर हल्का झाग निकाला जाता है जिसको स्कुप से ग्लास में डाला जाता है और ऊपर से जयफल और दालचीनी छिड़का जाता है।

रावो: यह पारसी खाद्द सिर्फ विशेष अवसरों पर ही बनाया जाता है। बारीक सेवई को चीनी के चाशनी और सूजी में पकाया जाता है। इस व्यंजन को बदाम और किशमिश से सजाया जाता है।

डेज़र्ट में फालुदा और कुल्फ़ी मील के अंत में परोसा जाता है। यह पेट को आराम पहुँचाता है जब ठंडा परोसा जाता है। इसके अलावा लोकप्रिय पारसी डेज़र्ट में कोपरा पाक (नारियल से बना होता है), गारी खजूर नी (फ्राईड डेट पाई), कुम्मस (दही से बना केक), सद्नास (भाप में पकाया चावल का पैनकेक), और दूधी नु मुरब्बा।

पारसी भोज का स्वाद

आनंद प्रेमी पारसी सम्प्रदाय के जीवन का एक ही अन्यतम अंग है, भव्य, स्वादिष्ट भोजन। कोई भी पारसी का समारोह अच्छे भोजन, एक जोड़ा ड्रिंक और नृत्य के लिए कुछ तालयुक्त गीत के बिना पूरा नहीं होता है । ज़ोरोस्ट्रियन नये वर्ष नवरोज़ के दौरान संप्रदाय के सभी एक जगह एकत्र होते हैं और छह सलाना भोज, जो घामबार के नाम से जाना जाता है, उसमें स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं।

शादी के अवसर पर भोज जिसे लगन नु भोनु कहते हैं वह राजाओं के भोज की तरह होता है। यह पार्टी खंड-खंड करके मनाई जाती है, हर खंड में तीन सौ से चार सौ मेहमान रहते हैं। आखरी खंड में मेज़बान और उनके करीबी रिश्तेदार रहते हैं। मेज़बान मेहमान को यह कहकर बुलाते हैं- ‘जम्वा चलो जी’ (भोजन के लिए चले)। लंबे मेज़ एक दूसरे के सामने इस तरह लगाये जाते हैं कि एक मेज़ पर बैठने वाले का मुँह दूसरे वाले के सामने हो। दो टेबल के बीच थोड़ी-सी जगह खाना परोसने के लिए छोड़ी जाती है। शाकाहारी अलग बैठते हैं, उन्हें घी से बने गुजराती थाली दी जाती है।

पाकशैली को इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि भोजन रोचक और स्वादिष्ट हो। पहले पात्रा (केला का पत्ता) सामने रखा जाता है। थाली के ऊपर के दाहिने कोने में अचार और चपाती के साथ परोसना शुरू होता है और उसके साथ सब्ज़ी में पारसी लगनसारा स्टू परोसा जाता है। शादी या लगन के अवसर पर परम्परागत रूप से ड्राई फ्रूट और गाजर का अचार, लगन नु अचार दिया जाता है।

फिर मछली परोसा जाता है। हमेशा से ही मछली में पॉमफ्रेट रहता है, जिसका चुनाव वज़न करके किया जाता है। इससे सास नी मच्छी या पात्रा नी मच्छी बनाया जाता है या तीसरे व्यंजन में तारापोरी सूखा भूभाल नो पातिओ बनाया जाता है। ड्राई बॉम्बे डक को प्याज़ और विनेगर की ग्रेवी में डालकर अचार बनाया जाता है।

फिर विभिन्न प्रकार के चिकन के व्यंजनों की शुरूआत होती है जैसे- मारघी मा फारचा या साली मा मारघी, जिसको सल्ली के साथ टोमाटो प्यूरे के साथ चिकन को धीरे-धीरे पकाया जाता है। मीट को बकरी के बच्चे और मेमने के गोश्त के रूप में अच्छा और गुलाबी रंग में अदरक डालकर उबाला जाता है।

चावल को ज़्यादातर मटन पुलाव (या वेजिटेबल पुलाव) और धनसक मसाला दाल के साथ परोसा जाता है।

जब आप यह स्वादिष्ट भोजन को व्यवस्थित रूप में देने में व्यस्त हो तब मील के अंत में पात्रा में सबसे अंत में लगन नु कस्टर्ड को परोसा जाता है। यही पर मिठास का अंत नहीं होता है, ठंडे कुल्फ़ी के साथ अंत होता है।

सब कुछ लकड़ी के आग में पकाया जाता है और इससे खाद्द में अद्वितीय स्वाद आ जाता है। अंडा तो ज़रूरी ही है, हर व्यक्ति के लिए दो निर्धारित होते हैं। बड़े चपटे ट्रे में बीस अंडे बहुत सारे घी में फ्राई किये जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर व्यंजन एक ही बार पकाया जाता है, बार-बार गरम करके नहीं दिया जाता है। खाना समय पर ही बनकर तैयार हो जाता है, जिससे लोग तुरन्त खाना खाने आ जाते हैं। इससे हमारे मुँह में पानी आ जाता है, अतः आगे बढ़कर पारसी व्यंजन का मज़ा उठायें।


MasterChef Sanjeev Kapoor

Chef Sanjeev Kapoor is the most celebrated face of Indian cuisine. He is Chef extraordinaire, runs a successful TV Channel FoodFood, hosted Khana Khazana cookery show on television for more than 17 years, author of 150+ best selling cookbooks, restaurateur and winner of several culinary awards. He is living his dream of making Indian cuisine the number one in the world and empowering women through power of cooking to become self sufficient. His recipe portal www.sanjeevkapoor.com is a complete cookery manual with a compendium of more than 10,000 tried & tested recipes, videos, articles, tips & trivia and a wealth of information on the art and craft of cooking in both English and Hindi.