Advertisement

Home » Cuisine of the month » gujarati

गुज्जरों का देश - गुजरात राज्य ने मुख्य रूप से तीन कारणों की वजह से दुनिया के नक्शे पर अपनी छाप छोड़ी है: 1) उसका व्यापार समुदाय जिसने अपनी उपस्थिति न सिर्फ भारत में महसूस करवाई है बल्कि दुनिया के कोने-कोने में करवाई है। 2) आधुनिक भारत के पिता, महात्मा गांधी और स्टील मैन ऑफ इंडिया, सरदार पटेल इसी राज्य से थे और 3) ऑपरेशन फ्लड, जो इस भूमि ने दूध और दूध उत्पादों के उत्पादन में एक क्रांति लाया, और इस प्रकार भारत को विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनाया।

गुजरात के बारे में
गुजरात भारत के पश्चिमी तट के उत्तरी छोर पर आता है। इसका नाम 8 वीं और 9 वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान क्षेत्र पर शासन करनेवाले गुज्जरों, जो कि एक उप जनजाति हन् में आते थे, से प्राप्त किया गया है। गुजरात, जो वर्तमान में है, तब अस्तित्व में आया जब 1960 में, भाषा के आधार पर, बंबई राज्य को महाराष्ट्र और गुजरात में विभाजित किया गया था। इस राज्य के उत्तर में है राजस्थान, पूर्व में है मध्य प्रदेश, दक्षिण में है महाराष्ट्र, पश्चिम में है अरब सागर और उत्तर पश्चिम में है पाकिस्तान। हालांकि इस राज्य का कोई भी हिस्सा 160 किलोमीटर से अधिक समुद्र से दूर नहीं है, फिर भी यह कई विरोधाभासों का देश है। गुजरात साउथवेस्ट मॉनसून की मुख्य नमी वाले हवाओं के उत्तरी छोर पर स्थित है।

इसके परिणाम स्वरूप, हालांकि पूरे राज्य में तापमान एक समान ही है पर वर्षा में महान विविधतायें पता चलती हैं। इस राज्य में से कई नदियाँ, जैसे नर्मदा, साबरमती, माही और ताप्ती, बहती हैं जो कि बड़ी मात्रा में अलूवियम जमा करती हैं जो एक अच्छी कृषि भूमि को जन्म देता है। आबादी का दो तिहाई से अधिक हिस्सा भूमि को जोतता है और लगभग आधा राज्य खेती की भूमि से आच्छादित है। गेहूँ, बाजरा, चावल और बाजरा अधिक मात्रा में उगाये जाते हैं। रुई के अलावा, यह राज्य मूंगफली का प्रमुख उत्पादक है, जो भारत के एक तिहाई उत्पादन के लिए लेखांकन करता है। तंबाकू भी भरपूर मात्रा में उगाया जाता है।

लोग और संस्कृति
गुजरात राज्य को 3 मुख्य हिस्सों में बाँटा जा सकता है: पूर्वी गुजरात, सौराष्ट्र जिसे काठियावार भी कहा जाता है और पश्चिमी गुजरात जिसे कच्छ भी कहा जाता है। अहमदाबाद गुजरात का एक सिद्धांत और औद्योगिक शहर है। महात्मा गांधी के नाम पर गांधीनगर, जो इस राज्य की राजधानी है, भारत में चंडीगढ़ के बाद दूसरी आयोजित शहर है। बड़ौदा, सूरत, भुज, राजकोट, पोरबंदर और जामनगर जैसे अन्य स्थान मुख्य शहर हैं जो प्राचीन परंपराओं और आधुनिक संस्कृतियों का एक महत्वपूर्ण मिश्रण हैं।

धर्मों के संयोजन ने गुजरात को तीर्थयात्रा के नक्शे पर डाल दिया है। एक सूक्ष्म जगत में धर्मों की एक बड़ी संख्या प्रदान करने के अलावा गुजरात में कई आश्रम भी हैं। सोमनाथ और द्वारका हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र हैं, पालिताना जैन के लिये है, दियु अत्यधिक ईसाइयों द्वारा माना जाता है और कुछ सबसे सुंदर और पवित्र मस्जिद गुजरात में हैं। गुजरात के लोगों को धर्म के संबंध में तीन प्रमुख समूहों में बांटा गया है – हिंदू, पारसी और मुसलमान। गुजरातियों के अलावा, कुछ लोग सौराष्ट्र और कच्छ से हैं जिनकी विशिष्ट संस्कृति होने के साथ-साथ अलग-अलग बोलियाँ भी हैं। पूर्व और दक्षिण गुजरात के हाइलैंड में लोग आदिवासी और पिछड़े हैं। वे साधारण और मेहनती होते हैं। उनका सामाजिक जीवन, सीमा शुल्क, परंपरायें, जीने का तरीका अन्य क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से काफी अलग होता है। गुजरात के कच्छ क्षेत्र से संबंधित लोग मेहनती होते हैं और व्यापार दिमाग वाले होते हैं। सौराष्ट्र के लोग मेहमाननवाज़ और कलात्मक होते हैं। लोगों की इसी विशेषता ने इस क्षेत्र की कला और साहित्य को प्रभावित किया है।

त्योहार और समारोह
गुजरात का उपयुक्त वर्णन उसे त्योहारों और मेलों का देश कहने से होगा क्योंकि यहाँ पर सालभर में लगभग 3,500 किस्में मनाई जाती हैं। इनमें से दो सौ से अधिक अविस्मरणीय अवसर होते हैं जो हज़ारों लोगों को आकर्षित करते हैं। भारत के अन्य जगहों की तरह, गुजरात के त्योहार और मेले भी एक अवसर के चारों ओर घूमते हैं – चाहे वे मौसम में तबदीली हो, एक सुनहरे खेत से फसल काटने का समय हो या भारत का व्यापक और समृद्ध पौराणिक परंपरा की एक धार्मिक घटना हो। इनमें से सबसे अविस्मरणीय त्योहार है 14 जनवरी को आयोजित किया गया पतंग महोत्सव, जो मकर संक्रांती का दिन होता है और इस दिन गुजरात के आसमान में हज़ारों पतंग दिखाई देते हैं। दुसरे मनाये जाने वाले त्योहार हैं गोकुलअश्टमी, नवरात्री, दिवाली और पतेती।

विशेष भोजन

गुजरात का भोजन अधिकतर शाकाहारी और सरल होता है। पलसेस, दाल और अनाज का अधिकतर प्रयोग होता है। हालांकि गुजरात को एक लंबा समुद्र तट होने के साथ-साथ मछली और शेलफिश की अनंत आपूर्ति है, फिर भी वहाँ ज़्यादातर लोग जैन धर्म का पालन करते हैं। और धर्म के सख्त आदेश के अनुसार मांसाहारी भोजन खाना निषिद्ध है। शायद यही एक कारण है कि गुजराती शाकाहारी खाना पकाने की कला में माहिर हैं। वे सबसे सरल सामग्रियों से सबसे स्वादिष्ट व्यंजन बना सकते हैं और इसमें एक विशाल विविधता है। खाना पकाना सामग्रियों की उपलब्धता के आसपास घूमता है। पश्चिमी गुजरात या सौराष्ट्र सूखा है और इधर ताज़ी सब्ज़ियों का मिलना मुश्किल होता है। सौभाग्य से इस प्रायद्वीप का मिश्रित खेती भरपूर मात्रा में डेयरी उत्पादों का खाता खोलता है इसलिए यहां भोजन अभी तक साधारण होते हुये भी पौष्टिक है। ताज़ी सब्जियों की कमी होने के कारण यहाँ नमकीन बनाना और निर्जलित सब्ज़ियों का उपयोग करना आम बात है। सेंट्रल गुजरात, जो है अहमदाबाद और खेड़ा, गुजरात का अन्न भंडार है जहाँ के अधिकतर लोग खाद्यान्न के खेती करने में ही लगे होते हैं। नतीजतन उनका भोजन चावल, दाल, बाजरा और इसी प्रकार के अन्य अन्न पर आधारित है। सूरत क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है और इसके परिणामस्वरूप यहाँ प्रचूर मात्रा में हरी सब्ज़ियां, आम के बाग, केले, चीकू और चकोतरे पाये जाते हैं। यहाँ के लोग स्वादिष्ट भोजन पसंद करने वाले होते हैं और अच्छा खाना पसंद करते हैं। व्यंजन के रूप के साथ-साथ स्वाद की भी अच्छी तरह से देखभाल की जाती है। बेकरी की दुकानें और अन्य मिठाइयों का विशाल प्रदर्शन खाद्य प्रेमियों को उनकी उंगलियाँ चाटने के साथ-साथ अधिक खाने के लिये मजबूर कर देते हैं। खोजा, गुजरात में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा, का आकर्षक व्यंजन होता है जिसमें मुख्य रूप से मांसाहारी भोजन होता है पर वह लोकप्रिय मुगल भोजन से अलग होता है। हालांकि इसमें कुछ गुजराती प्रभाव होते हैं फिर भी यह अलग है। हालांकि हींग गुजराती भोजन का एक अभिन्न अंग है, पर यह खोजा भोजन में अनुपस्थित है जबकि हारा मसाला व्यावहारिक रूप से हर दूसरे पकवान में डाला जाता है। गुजरात का भोजन काफी हद तक त्योहारों, अवसरों और मौसमों को ध्यान में रख कर ही बनाया जाता है। गुजराती व्यंजन में स्वाद, प्रस्तुति और खाना पकाने की तकनीकों के बारे में काफी कुछ बताया जाता है। एक ठेठ भोजन में गेहूं के आटे या बाजरे के आटे से बनी रोतली या ब्रेड, एक शाक या सब्ज़ी का पकवान, दाल, चावल, छास का एक ग्लास और एक मिठाई होता है। इस क्षेत्र की सभी व्यंजनों में एक आम बात होती है और वह ये है कि उनमें मिठास की एक छोटी सी रंगत होती है – और यह इसलिये क्योंकि गुजराती पकवान में गुड़ का प्रयोग किया जाता है। एक गुजराती घर में स्नैक्स् भी उतने ही आवश्यक हैं जितने की मुख्य मील जैसे दोपहर और रात का भोजन। गुजराती व्यंजन, सर्दियों और गर्मियों के लिए विभिन्न व्यंजनों के साथ, काफी हद तक मौसम पर भी निर्भर करता है। जबकि अधिकतर भोजन भाप में बना हुआ और स्वस्थ होता है, पर कुछ चीज़ें तली हुई भी होती हैं। खाखरा और थेपला अधिकतम स्वस्थ होते हैं और आजकल भारत भर में और विदेश में भी दुकानों में आसानी से उपलब्ध हैं। पोषण के सभी पहलू जैसे कार्बोहायड्रेट्स्, प्रोटीन्स्, फैट्स्, विटामिन्स् और मिनरल्स् जो कि चपाती, चावल, सब्ज़ियाँ, दाल, सलाद, मीठा और दूध की पदार्थों से मिलते हैं, गुजराती खाना कुछ बहुत ही स्वस्थ संयोजन प्रदान करता है। एक पूर्ण गुजराती मील खायें और अपने स्वाद के सभी छह होशों को संतुष्ट करें।

धोकला: बेसन से बना यह स्नैक इतना लोकप्रिय है कि इसका प्रयोग बहुत बार गुजरातियों को बुलाने के लिये किया जाता है। फरमेन्ट किये हुये बेसन के बैटर को स्टीम किया जाता है और फिर उसमें कुछ मसालों के साथ तड़का मारा जाता है। इस मीठे, तीखे और नमकीन स्नैक को दिन के किसी भी समय खाया जाता है।

फाफड़ा: ये कुरकुरे तले हुये बेसन के मसालेवाले लोई से बने हुये लम्बे स्ट्रिप्स् गुजरात के सबसे लोकप्रिय ब्रेकफास्ट आइटम में से एक हैं। इन्हे कई बार चटनी और जलेबियों के साथ परोसा जाता है।

उन्धियो: यह सर्दिंयों के मौसम में गुजरात के हर घर में बनने वाली सब्ज़ी है जिसे मौसम में पाई जाने वालीं कई सब्ज़ियों और तले हुये बेसन के गोले, जिन्हे मुठिया कहा जाता है, के मिश्रण से बनाया जाता है।

खान्डवी: यह बेसन और दही के मिश्रण से बना एक नमकीन पिनव्हील स्नैक है जिसे बाद में तिल के दाने और सरसों के दानों से तड़का मारकर, धनिया पत्ते और नारियल से सजाकर परोसा जाता है।

दूधी ना मुठिया: ये कसे हुये दूधी/लौकी, बेसन, आटा और कुछ मज़ेदार मसालों से बने डम्पलिंग्स् होते हैं। इन्हे एक स्नैक की तरह खाने के साथ-साथ किसी मील के साथ भी खाया जा सकता है।

थेपला: ये रोटियों कि तरह ही होते हैं, बस इनमें ताज़े मेथी के पत्ते और मसाले भी डाले जाते हैं। इन्हे अधिकतर एक मीठे कसे हुये आम के अचार या चटनी, जिसे छुंदा कहा जाता है, के साथ खाया जाता है।

दाल ढोकली: ये अपने आप में ही एक सम्पपूर्ण मील होता है। रोटी की तरह चपटी, मसालेदार आटे के डम्पलिंग्स् के टुकड़ों को एक गाढ़े मीठे और तीखे दाल में सोखा जाता है।

सेव टमेटा नू शाक: यह डिश टमाटर और बेसन के पतले तले रेशे, जिन्हे सेव कहा जाता है, से बनाया जाता है। सेव स्वादिष्ट टमाटर की करी से सभी स्वाद को सोख लेते हैं और यह चावल और रोटी के साथ खाने में बहुत अच्छा लगता है।

ओसामन: पानी जैसी पतली, पर स्वाद और पोषण से भरी गुजरात की एक रेसिपी।

मोहनथाल: हर टुकड़े में बसे कुरकुरे ड्राइड फ्रूट्स से बना एक स्वादिष्ट बेसन की बर्फी।


MasterChef Sanjeev Kapoor

Chef Sanjeev Kapoor is the most celebrated face of Indian cuisine. He is Chef extraordinaire, runs a successful TV Channel FoodFood, hosted Khana Khazana cookery show on television for more than 17 years, author of 150+ best selling cookbooks, restaurateur and winner of several culinary awards. He is living his dream of making Indian cuisine the number one in the world and empowering women through power of cooking to become self sufficient. His recipe portal www.sanjeevkapoor.com is a complete cookery manual with a compendium of more than 10,000 tried & tested recipes, videos, articles, tips & trivia and a wealth of information on the art and craft of cooking in both English and Hindi.