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अचार: पूरे साल के लिए तालु गुदगुदाने वाला :

भारतीय व्यंजनों में सब्ज़ियों की भूमिका बहुत बड़ी है और ये सब्ज़ियाँ हमें प्रेरित करती हैं, हमें लुभाती हैं। ये हमें इतनी प्यारी हैं कि विभिन्न प्रकार की सब्ज़ियों से हम अचार बनाते हैं। पिकलिंग मतलब कई महिनों तक सब्जि़यों का संरक्षण बड़े ही सावधानीपूर्वक न सिर्फ अचार बनाने के समय बल्कि संरक्षण के समय भी।

अचार बनाने के कुछ नियम हैं और हर नियम के पीछे कुछ कारण भी हैं।

ताज़ी कोमल मौसमी सब्ज़ियों का ही इस्तेमाल करें
सब्ज़ियों में कोई भी खराब या सड़ा-गला अंश न हो। कभी खराब अंश को काटकर बाकी अंश को लेने की कोशिश न करें। ख़राब सब्ज़ी के अंश से बने अचार कभी भी ज़्यादा दिन अच्छा नहीं रहता है। मौसमी सब्ज़ियाँ और फल स्वाद में भी अच्छे होते हैं, सस्ते होते हैं और ज़्यादा मात्रा में मिलते भी हैं। अच्छे लंबे आयु वाले अचार का रहस्य - ताज़गी।

सब्ज़ी को अच्छी तरह धोकर सुखा लें
सब्ज़ी और फल को सिर्फ रगड़कर धोएं ही नहीं बल्कि अच्छी तरह सुखा भी लें। जीवाणु के क्रिया-कलाप से बचाव करता है। नमी के सतह पर जीवाणु पैदा होते हैं। अचार के खराब होने का कारण जीवाणु का पैदा होना है।

ज़्यादा नमी वाली सब्ज़ियों को पहले लें
सब्ज़ियों में बीटरूट (चुकंदर), खीरा, प्याज़, बंदगोभी, फूलगोभी और बीन्स का अचार बनाने से पहले ब्राइन के सोल्युशन में चौबिस घंटे पूरी तरह डुबाकर रखें। फिर धोकर, छानकर, अच्छी तरह सुखा लें। अब वे अचार बनाने के लिए तैयार हैं, अतिरिक्त नमी को सोख लिया गया है, अचार लंबे समय तक ठीक रहेगा

उबले हुए पानी का इस्तेमाल करें
जब पानी वाला अचार बना रहें हों तो उबले हुए पानी का इस्तेमाल करें, सीधे नल से पानी न लें। साफ उबलता पानी जीवाणु के कार्य-कलाप को सक्रिय नहीं होने देता है।

पूरे फल को छेद कर दे
र्फाक से फल को छेद करने से प्रेज़रभवेटिव एजेन्ट फल के किनारों में घुस जाते हैं जिससे उन्हें लंबी आयु प्राप्त होती है।

अच्छे तेल का उपयोग करें
प्रांतीय अचारों में विभिन्न तरह के तेल का इस्तेमाल होता है। उत्तरी भारत में ज़्यादातर लोग सरसों का तेल और दक्षिणी राज्यों में तिल का तेल का इस्तेमाल करते हैं। अचार का अच्छा होना सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं करता है बल्कि अन्य सामग्रियों के क्वालिटी पर निर्भर करता है (जैसे-तेल, मसाले और नमक)। सभी सामग्रियाँ अच्छे क्वालिटी के होनी चाहिये। मैरिनेड का एसिडिक नेचर जीवाणु के वृद्धि को कम करता है, जब कि तेल प्रेज़रवेटिव का काम करता है। अचार तब तक ताज़ा और स्वादिष्ट रहता है जब तक वह नमी के संपर्क में न आए। व्यवसायिक क्षेत्र के लिये बने अचार में सिट्रिक एसिड या सोडियम बेनज़ोएट जैसे प्रेज़रवेटिव डाले जाते हैं।

अचार बनाने के लिए तिल के तेल की तुलना में रिफाइन्ड तेल ज़्यादा लोकप्रिय है
अगर अचार को ज़्यादा दिन के लिए संरक्षित करना है तो रिफाइन्ड तेल का इस्तेमाल करना चाहिये। तिल का तेल ज़्यादा दिनों तक रखने पर विकृत गंध देने लगता है। सभी पानी या लिक्विड वाले अचारों में मसाले वाला तरल ठोस पदार्थ से एक इंच ऊपर रहने चाहिए। यही विधि तेल वाले अचार के लिये भी है। ऊपर वाला अतिरिक्त तेल जीवाणु के वृद्धि को रोकता है।

नमक और हल्दी सभी ज़रूरी हैं
नमक और हल्दी दोनों प्रेज़रवेटिव का काम करते हैं। रेसिपी में जितनी मात्रा दी होती है उसमें स्वादानुसार थोड़ा फेर-बदल किया जा सकता है। नमक की मात्रा में कमी धीरे-धीरे करें, ज़्यादा कम न करें इससे खराब होने का डर रहता है। हल्दी अचार में आकर्षक रंग लाती है।

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Chef Sanjeev Kapoor is the most celebrated face of Indian cuisine. He is Chef extraordinaire, runs a successful TV Channel FoodFood, hosted Khana Khazana cookery show on television for more than 17 years, author of 150+ best selling cookbooks, restaurateur and winner of several culinary awards. He is living his dream of making Indian cuisine the number one in the world and empowering women through power of cooking to become self sufficient. His recipe portal www.sanjeevkapoor.com is a complete cookery manual with a compendium of more than 10,000 tried & tested recipes, videos, articles, tips & trivia and a wealth of information on the art and craft of cooking in both English and Hindi.