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जीवन के दुख और सुख के लिए पारसियों का धन्यवाद-ज्ञापन :

जो लोग पारसी नहीं है, उन लोगों का मानना है कि पतेती पारसियों का नया साल है, लेकिन तथ्य यह है कि, पतेती के नए साल की संध्या अंतिम गाथा में दिवंगत आत्मा के स्मृति में बीत जाता है। आनंद के प्राप्ति के लिए धन्यवाद-ज्ञापन होता है। जब कोई कार्य अच्छी सोच, अच्छे शब्द से नहीं किया गया हो, उसके लिए यह समय पश्चताप-ज्ञापन का होता है। जो कुछ भी सहमति से बाहर है, उसे पाप मान लिया जाता है।

 

प्रार्थना और दान

पारसियों का पश्चताप करने का तरीका है, नए कपड़े और फूलों के साथ प्रार्थना और दान करके। वे अपने पतेत को स्वादिष्ट पीलाफ, दाल, सल्ली बोटी, कस्टर्ड के भोज के साथ दिन का अंत करते हैं। यह माना जाता है कि फ्राबाशीश (आत्मा) इन सुगंधित गंध और सुंदर परिवेश का आनंद उठाते हैं।

नवरोज़, पतेती के पहले दिन होता है, जो साल का आखरी दिन और हिसाब को ख़त्म करने का दिन होता है। पतेती की महत्ता इसी में है कि इस दिन बीते साल में किए गए पाप और गलत कार्य के लिए पश्चताप ज्ञापन करें। पतेती के दिन पारसी अग्नि मंदिर या एजिएरी जाते हैं। पारसी इस दिन वादा करते हैं कि वे अच्छा सोचेंगे, अच्छे शब्द का व्यवहार करेंगे और अच्छे कार्य करेंगे।

नवरोज़ के पहले के पाँच दिन, वे अग्नि में धूप/लोबान जलाते हैं, रात प्रार्थना के कमरे में गुज़ारते हैं। पुर्वजों के याद में ताज़े फ़ूल चाँदी के फूलदानियों में सजाए जाते हैं और उसे सफेद मार्बल जैसे ऊंचे टेबल पर रखा जाता है। फूल को प्रकाश से, चंदन की लकड़ी जलाकर, उसमें धूप डालकर वातावरण पैदा करके फ्राबाशीश (आत्मा) को आमंत्रित किया जाता है। पुराने पंथा के मानने वाले पारसी इन दिनों सारे सांसारिक कार्यों से सन्यास लेकर प्रार्थना में लीन हो जाते हैं। इस पंथा के कड़े समर्थक इन पाँच दिनों तक न अपने बाल काटते हैं, न दाढ़ी बनाते हैं और न ही नाखून काटते हैं।


 

जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है

पारसियों का नया वर्ष परम्परागत नये जोश और उत्साह और मौज-मस्ती के साथ मनाया जाता है। पारसी कुश्ती या पवित्र वेस्ट पहनते हैं। पुरुष परम्परागत कपड़े, जिसे दागली कहा जाता है और महिलाएँ परम्परागत गारा साड़ी पहनती हैं। पूजा की जाती है और अग्नि में चंदन की लकड़ी दी जाती है।

दूसरे त्यौहारों की तरह नये साल के दिन के लिए घर की साफ-सफाई की जाती है। चौक चंदन यानि रंगोली से घर के द्वार को सजाया जाता है। फूलों से अतिथियों के स्वागत के लिए द्वार को सजाया जाता है। बच्चों को तिलक लगाकर नये कपड़े पहनाकर, नये मेनू के व्यंजन बनाए जाते हैं। जश्न या अग्नि मंदिर में प्रार्थना का ज्ञाप करके, सारा दिन परिवारजनों और मित्रगण को साल मुबारकबाद दिया जाता है। दोस्तों से मिलने मिलाने के अलावा सुतेरफेनी, जलेबी और मछली बनाये जाते हैं।

छह दिन बाद खोरदाद साल मनाया जाता है, जो भगवान जोरोआस्टर के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। पारसी उस दिन अग्नि देवता की पूजा करते हैं और विशेष पारसी भोज बनाए जाते हैं।

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MasterChef Sanjeev Kapoor

Chef Sanjeev Kapoor is the most celebrated face of Indian cuisine. He is Chef extraordinaire, runs a successful TV Channel FoodFood, hosted Khana Khazana cookery show on television for more than 17 years, author of 150+ best selling cookbooks, restaurateur and winner of several culinary awards. He is living his dream of making Indian cuisine the number one in the world and empowering women through power of cooking to become self sufficient. His recipe portal www.sanjeevkapoor.com is a complete cookery manual with a compendium of more than 10,000 tried & tested recipes, videos, articles, tips & trivia and a wealth of information on the art and craft of cooking in both English and Hindi.