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जब हम मॉनसून कहते हैं तो हमें क्या याद आता है? वर्षा की बूंदें जब धरती पर पड़ती हैं तब हृदय को खुश कर देने वाली महक जो अच्छे फसल का प्रतीक होता है, पेड़-पौधे का क्षेत्र-विशेष में उगना और बहुत सारी अच्छी चीज़ों की याद आती है।

भारत में मॉनसून के समय त्यौहारों की कमी नहीं होती है। लोग इस मौसम का इंतज़ार करते हैं। देश के ज़्यादातर भागों में गर्मी का तेज़ जारी रहता है।

भारत के कुछ भागों में मॉनसून जून से सितम्बर तक चलता है, जुलाई और अगस्त महीनों में अपने चरम अवस्था में रहता है, जब देश के कुछ राज्य बारिश के जल से निमग्न हो जाते हैं। जो लोग इस अवस्था से प्रभावित होते हैं उनके लिये यह मुश्किल का समय होता है यहाँ तक कि छुट्टियाँ भी नमी के समेटे में आ जाती हैं। यात्रा करना भी मुश्किल का समय होता है, पूरी छुट्टी यूं ही कट जाती हैं और लोग घर में बंदी हो जाते हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है, कभी-कभी यात्रा के दौरान भी लुत्फ़ उठाया जा सकता है, जैसे मॉनसून पिकनिक आदि।

मॉनसून कैसे आता है
थार मरूभूमि और आस पास का इलाका गर्मी के कारण निम्न तापमान में चला जाता है जो दक्षिण पश्चिमी मॉनसून को आकर्षित करता है। हिन्द महासागर से नमी भरे मेघ आते हैं जो ज़्यादा दूर हिमालय के प्राँत तक नहीं पहुँच पाते हैं और उसको बढ़ने दिया जाता है। जितना ऊपर बादल जायेगा उतना तापमान गिरेगा और वर्षा लायेगा। जब बारिश होने वाले मेघ भारत में पहुँचते है - दो भागों में बट जाते है - एक भाग अरब सागर के उत्तरी भाग में बरसता है तो दूसरा भाग पश्चिमी घाट में बरसता है और दूसरा भाग बंगाल की खाड़ी, असम और पश्चिमी हिमालय के प्राँत में जाता है।

मॉनसून की प्रगति
शुरू से ही तेज़ बारिश नहीं होने लगती है। दो दिन गरजना और चमकना आदि होता है। इसको मॉनसून शावर कहते हैं। फिर बाद के दिनों में तेज़ बारिश होने लगती है। इस समय आकाश में काले मेघों का राज होता है और सूर्य मुश्किल से नज़र आता है। कुछ दिनों बाद ही बारिश शुरु होती है।

हर साल बारिश की पहली बूंद हमें हमारे बचपन के यादों में ले जाते हैं तब हम बारिश में भीगना पसंद करते थे, यह भी नहीं सोचते थे कि कपड़े गंदे हो जायेंगे या ज़ुखाम हो जायेगा। जैसे ही पहली बारिश होती है हम दौड़कर सड़क पर म़ुँह को ऊपर किये हुये चले जाते थे। कभी-कभी हमारे बड़े भी इस खुशी में शामिल हो जाते थे।

मॉनसून पाकशैली

कुछ प्राप्ति कुछ विषाद
तकलीफ़ देने वाली तेज़ ताप से वर्षा हमें राहत दिलाती है मगर अचानक ताप के गिरने से हमारे शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को धक्का लगता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रस्त हो जाते हैं।

यहाँ कुछ टिप्स दिये जा रहे हैं जो मॉनसून के मौसम को आसानी से पार करने में मदद करेंगे, इसको मानने पर थोड़ा या स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या उत्पन्न नहीं होगी:

• भारी खाना न खायें। हल्का और आसानी से हज़म हो जाने वाले खाने, उबला या भाप में पकी हुई सब्ज़ी, स्टीम्ड सलाद, फल, खिचड़ी, मकई और ओटमील आदि खायें।

• गरम, अम्लीय, खट्टा और नमकीन खाद्द जैसे अचार, मसालेदार करी, मिर्च, दही, डीप फ्राईड फूड, जंक फूड, और मीठा और बहुत मीठा डेजट् न खायें। इससे जल प्रतिधारण, बदहजमी, हाइपर ऐसिडटि और सूजन होने लगता है।

•माँसाहारी भोजन का अंतर्ग्रहण संतुलित मात्रा मे करें, क्योंकि यह आद्र जलवायु में आसानी से संदूषित हो जाता है। रेड मीट खाने से बचें।

•खाना पकाने में घी, ऑलिव आइल, कॉर्न आइल और सनफ्लावर आइल का इस्तेमाल करें क्योंकि यह हल्का होता है। भारी तेल में सरसों का तेल, बटर, बादाम तेल और दूसरे भारी और गरम तेल से बचें।

• फैट में घी, ऑलिव आइल, कॉर्न आइल और सनफ्लावर आइल का इस्तेमाल करें न कि सरसों का तेल, मक्खन, बादाम तेल का क्योंकि यह भारी और गरम होता है।

• भारी व्यायामों में दौड़ना, साइकिल चलाने आदि से बचें। इसके जगह पर योगा, हल्का नृत्य, पैदल चलना, तैरना और हाथों को खींचना आदि करें।

• सभी सब्ज़ियों और फलों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धो लें विशेषकर हरे पत्तेदार सब्ज़ियों को।

• सड़क पर बनाने वाले खानों से बचें जबकि वे स्वादिष्ट तो होते हैं मगर जैसा की हम जानते हैं वे साफ-सुथरे तरीके से नहीं बनाये जाते हैं। इसके अलावा आद्रता में जीवाणु पनपते हैं।

• अपने शरीर और मन को शाँत रखें क्योंकि यह क्रोध, चिड़चिड़ापन, ईष्या का भाव गरम होता है और इससे एग्ज़ीमा, हार्टबर्न और मूत्रमार्ग में संक्रमण होता है।

मॉनसून में स्वादिष्ट पाकशैली
अगर बहुत सारे त्यौहार होते तो भोज भी दूर नहीं होते। बहुत लोग गरम पकौड़ों का सपना देखते हैं, मगर बहुत सारा अच्छा नहीं होता है। घर पर बना चाट के साथ मसाला चाय का लुत्फ़ उठायें।

मकई के दानों को कोयले के आग में भूना जाता है, नमक, लाल मिर्च पावडर और नींबु का रस रगड़ा जाता है और इसका लुत्फ़ तभी उठाया जाता है, जब वर्षा अपने चरम अवस्था में रहता है।

अगर आप कटलेट या कबाब खाना चाहते हैं तो ओवन में थोड़ा तेल लगाकर ग्रिल करें - विश्वास कीजिये बहुत अच्छा स्वाद होगा।

वर्षा के मौसम में बहुत सारे फल पाये जाते हैं, अतः इसका इस्तेमाल अच्छी तरह करें। आप इनका मिल्क शेक, फ्रूट सलाद, फ्रूट पर पुड्डिंग या यूं ही खाकर आनंद उठा सकते हैं। निष्कर्ष यही है कि अच्छा खायें, स्वास्थ्यवर्द्धक खाने का चुनाव करें और वर्षा का आनंद उठायें।

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MasterChef Sanjeev Kapoor

Chef Sanjeev Kapoor is the most celebrated face of Indian cuisine. He is Chef extraordinaire, runs a successful TV Channel FoodFood, hosted Khana Khazana cookery show on television for more than 17 years, author of 150+ best selling cookbooks, restaurateur and winner of several culinary awards. He is living his dream of making Indian cuisine the number one in the world and empowering women through power of cooking to become self sufficient. His recipe portal www.sanjeevkapoor.com is a complete cookery manual with a compendium of more than 10,000 tried & tested recipes, videos, articles, tips & trivia and a wealth of information on the art and craft of cooking in both English and Hindi.