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महाराष्ट्र, गोवा, कनार्टक और आंध्र प्रदेश के लिए भगवान गणेश का जन्म सबसे बड़ा उत्सव का दिन होता है। गणेश चतुर्थी का त्योहार भाद्र पद के शुक्ल पक्ष के चौथे दिन (अंग्रेज़ी महीने के अनुसार अगस्त/सितम्बर) आता है।

घंटे की रुनझुन और ‘जयदेव जयदेव जय मंगल मुर्ती, दर्शन माझे मन कामना पूर्ती, जयदेव जयदेव’ के गान के साथ भगवान गणेश की पूरी श्रद्धा से पूजा की शुरूआत होती है। इस दिन लोग गणेश जी की मूर्ती घर लाते हैं और बड़े समारोह का आयोजन करके पूजा करते हैं। दँसवें दिन यह उत्सव अपने चरम अवस्था में रहता है। दँसवे दिन अनन्त चतुर्थदशी होता है। चतुर्थदशी के दिन विभिन्न रंगों से बने हुए मुर्ती का विर्सजन होता है। चारों ओर लोग ‘गणपति बाप्पा मोरया, पुड़चा वर्षी लौकर या’(ओ गणपति बाप्पा, अगले वर्ष ज़रुर आना) के नारे लगाते हैं। सारा वातावरण अदभुत रूप से भक्तिमय हो जाता है।

भारत के लोकप्रिय त्योहारों में गणेश चतुर्थी एक है। 1893 में महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक ने सार्वजनिक समारोह के रूप में पूणे, महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की शुरूआत की। उनका एकमात्र ध्येय स्वतंत्रता के संग्राम के संदेश को फैलाना और एकता, देशभक्ति की भावना और विश्वास को प्रदान करना था।

पूणे शहर में गणेश उत्सव के अवसर पर महीने तक विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, कलाकार ,गायक, नृत्यशिल्पी अपने कला को भगवान गणेश के चरणों में भेंट करते हैं। ऐसा पूरे महाराष्ट्र भर में होता हैं।

हैदराबाद में, निज़ाम के शासन के समय महाराष्ट्री शासन के ऊँचे पदों पर आसिन थे। वे गणेश उत्सव मनाते थे, वहीं से आंध्र प्रदेश में इसका अंकुरण हुआ और आज भी यह प्रथा चली आ रही हैं। हैदराबाद के कलाकार गणेश की मूर्ति प्रतियोगिता करने के लिए बनाते हैं, कौन किससे ज़्यादा बड़ा और सुंदर बनाएगा।

हिन्दुओं के घर किसी भी रस्म की शुरुआत ‘ॐ गणेशायः नमः’ के मधुर मंत्र के साथ होती है। किसी भी देवी देवता के मंदिर में भगवान गणेश का स्थान ज़रूर रहता है। धर्मात्माओं के जीवन के पथ पर आने वाले किसी भी बाधा को भगवान गणेश के दया से अतिक्रम कर सकते हैं। उनके आर्शिवाद से जीवन में सफलता मिलती हैं और कोई भी प्राकृतिक संकट वापिस लौट जाता है। वह और उनका छोटा वाहन चूहा संतुलित जीवन के उदाहरण है - किस प्रकार दो विपरित जीवन जीने वाली प्राणी एक दूसरे के साथ शांतीपूर्वक रह सकते हैं।

भगवान गणेश की दंतकथाएं

भगवान गणेश के जन्म को लेकर कुछ कथाएँ दी जा रही हैं कि किस प्रकार भगवान गणेश को प्रधानता मिली।

#भगवान गणेश का जन्म:
दंतकथा के अनुसार, भगवान गणेश को देवी पार्वती की सृष्टि माना जाता है। जब वह स्नान करने के लिए जा रही थी तो उन्होंने चंदन के आटे से गणेश की सृष्टि की और उसमें जीवन का संचार किया। एक दिन देवी पार्वती स्नान के लिए जा रही थी तो उन्होंने गणेशजी को दरवाज़े की रखवाली के लिए कहा और यह भी कहा कि कोई भी अंदर न आ सके। उसी वक्त भगवान शंकर तपस्या से लौटकर आए और अपनी पत्नी पार्वती से मिलना चाहा। लेकिन गणेशजी ने उनको अंदर जाने से रोका, इस पर शंकरजी ने क्रुद्ध होकर अपने पुत्र का गला काट दिया। शोरगुल की आवाज़ सुनकर देवी पार्वती दौड़कर आई, आकर अपने पुत्र की इस अवस्था को देखकर रो पड़ी। उसके बाद भगवान शिव को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने देवी पार्वती से वादा किया कि वे अपने पुत्र को पुनः जीवन प्रदान करेंगे, जो जीवन्त प्राणी उनके रास्ते में प्रथम आएगा उसका मस्तक पुत्र को लगा देंगें और वह हाथी था।

#भगवान गणेश का अन्य देवों में सर्वोच्चता:
देवी पार्वती को एहसास हुआ कि उनके पुत्र के हस्ती मस्तक को देखकर कोई भी उनपर ध्यान नहीं देगा। तब भगवान शिव ने यह घोषणा की कि किसी भी भगवान की पूजा करने से पहले गणेशजी की पूजा होगी। यह सुनकर सारे देवता क्रोधित हो गए। सब ब्रह्मा के पास गए कि भगवान शिव ने यह क्या कर दिया। ब्रह्मा ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर तीनों समान है। तब वे भगवान शंकर के पास गए, उन्हें कहा कि आप बिना शक्ति की परिक्षा लिए सिर्फ गणेश को कैसे सर्वोच्चता प्रदान कर सकते हैं। सबकी बुद्धि की परिक्षा ली जाए, तब भगवान शिव ने कहा कि जो सबसे आगे पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगा के आएगा उसे ही सर्वोच्चता प्रदान की जाएगी। गणेश को छोड़कर सबका वाहन तेज़ और बड़ा है सब दौड़ पड़े। तब गणेशजी चूहा पर सवार होकर अपने माँ-पिता की परिक्रमा कर ली क्योंकि उनके चरण में ही सारा ब्रह्मांड समाया हुआ है। उनकी इस बुद्धिमत्ता को देखकर सभी देवताओं ने हार स्वीकार कर ली और उन्हें प्रभुता प्रदान की। कोई भी उत्सव, पूजा, शादी, पवित्र अवसर हो गणेशजी की पूजा पहले होती है।

#अभिशप्त चंद्रमा:
यह हुआ तब जब कुबेर, स्वर्गलोकवासी में सबसे धनवान थे और उन्होंने भगवान गणेश के सम्मान में महाभोज का आयोजन किया। गणेशजी के लिए यह सबसे खुशी का समय था, उन्होनें पेट भर कर खाया लेकिन इतना खाने के बाद उनका पेट इतना फूल गया कि जैसे वह फट जाएगा। पर माता-पिता को श्रद्धा कैसे अर्पित करेंगे, इसलिए उन्होंने पेट पर साँप बाँध लिया । वह नीचे झुककर प्रणाम करना चाह रहे हैं मगर गोल मोटे पेट के कारण कछुए की तरह लुड़क जा रहे हैं। यह सब देखकर चंद्रमा हँस पड़े। देवी पार्वती ने अपने प्रिय पुत्र के ऊपर हँसने पर चंद्रमा को अभिशाप दिया और कहा कि विनायक चतुर्थी के दिन जो चंद्रमा को देखेगा वह गलत काम के लिए दोषी ठहराया जाएगा।

एक कहानी अनुसार भाद्रपद चतुर्थी को भगवान कृष्ण ने दूध में चंद्रमा का प्रतिबिम्ब देख लिया था और उन पर समान्तक मणि चुराने का आरोप लगा। जाम्बवन्त नाम का एक भालु को जंगल में चमकता हुआ वह मणि मिला, वह उसको अपनी बेटी जाम्बवन्ती को खुश करने के लिए ले गया और उसके पालने के ऊपर टाँग दिया। भगवान कृष्ण ने वह मणि जंगल से खोज निकाली और वापिस करके आरोप से मुक्ती पाई, जाम्बवन्त से युद्ध के बाद। उस वक्त से अभिशाप से प्रभाव से दूर रहने के लिए देवी पार्वती ने घोषणा की कि ब्रह्मपद चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की कहानी जो सुनेगा और पूजा करेगा उस पर अभिशाप का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

भोज का अवसर

भगवान गणेश को हम दोनों हाथों में लड्डू लिए हुए देखते हैं और अच्छे-अच्छे पकवान खाने के प्रेमी है इस रुप में जाने जाते हैं। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन सारे अच्छे पकवान भोग लगाए जाते हैं। भगवान के खाने के बाद नैवद्द धर्मात्माओं में बाँटा जाता है।

इस अवसर पर बहुत तरह की मिठाईयाँ बनती हैं, लेकिन उन सब में लोकप्रिय है, मोदक। इस दिन मंदिर में जाकर गणेशजी की पूजा करते हैं और भगवान गणेश की मूर्ती को मिठाई प्रसादस्वरूप प्रदान करते हैं। इस त्योहार का आनंद मिठाई और स्वादिष्ट पकवान के बिना अधुरा है जैसे - बेसन का लड्डू, राघवदास लड्डू, काजू की बर्फी, पुलियोदाराई, करन्जी, पूरनपोली, रवा लड्डू और मूंग दाल हलवा आदि।

दक्षिण भारत में, वेल्ला कोज़ाकट्टाई नाम का सबसे मशहूर व्यंजन इस दिन बनाया जाता है, जो भगवान गणेश के पसंदीदा मिठाईयों में एक है। कोज़ाकट्टीयस चावल के आटे का होता है, जिसमें नारियल, गुड़, मसालों का स्टफ और फ्लेवर डालकर बनाया जाता है। तमिलनाडु में भाप में पकाया जाता है। दूसरे राज्यों में फ्राई किया जाता है।

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MasterChef Sanjeev Kapoor

Chef Sanjeev Kapoor is the most celebrated face of Indian cuisine. He is Chef extraordinaire, runs a successful TV Channel FoodFood, hosted Khana Khazana cookery show on television for more than 17 years, author of 150+ best selling cookbooks, restaurateur and winner of several culinary awards. He is living his dream of making Indian cuisine the number one in the world and empowering women through power of cooking to become self sufficient. His recipe portal www.sanjeevkapoor.com is a complete cookery manual with a compendium of more than 10,000 tried & tested recipes, videos, articles, tips & trivia and a wealth of information on the art and craft of cooking in both English and Hindi.