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दिपावली या दिवाली या प्रकाश का त्योहार सबसे चमकदार होता है। यह चार दिनों तक चलता है और तब पूरा देश प्रकाश और पटाखों से जगमगा उठता है। यह त्योहार खुशी और सौहार्द फैलाता है जिसमें मित्र और शत्रु सरोबार हो जाते है। यह त्योहार प्यार और अच्छाई से भरा होता है।

यह दशहरा के बीस दिन बाद आता है जो अश्विन महीना के पंद्रहवें दिन के पक्ष में अमवस्या के दिन मनाया जाता है। यह अंग्रेज़ी के अक्तुबर या नवम्बर महीने में आता है।

दिवाली का उद्भव
प्राचीन काल से ही दिवाली के मनाये जाने का पता चलता है। यह मूलतः कृषि प्रधान त्योहार है। लेकिन दंतकथाओं को नहीं भूल सकते हैं जो यह बताता है कि कैसे इस त्योहार को मनाया जाता है।

एक दंतकथा के अनुसार देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का इस दिन विवाह हुआ था। बंगाल में शक्ति की देवी काली को यह दिन समर्पित है। भगवान गणेश वह भगवान है जो पवित्र और न्याय की मूर्ती है, उनकी भी पूजा दिवाली में की जाती है। जैन लोगों का मानना है कि भगवान महावीर ने इसी दिन निर्वाण प्राप्त किया था। एक दूसरी दंतकथा भी है भगवान राम सीता और लक्ष्मण को लेकर चौदह साल के बाद रावण के चंगुल से सीता को छुड़ाकर अयोध्या लौटे थे। राजा के लौटने पर अयोध्यावासी पूरे अयोध्या को सजा दिया था।

दिवाली के सभी रीति-रिवाज़ की अपनी महत्ता है और सब की अपनी एक कहानी है। घर को प्रकाश से सजाना और आसमान पटाखों से जगमगाहट से भर जाना, सभी स्वास्थ्य, धन, ज्ञान, शांति और समृद्धि द्वारा स्वर्ग को सम्मान देने की एक विधि है। यह मान्यता है कि पटाखों की आवाज़ से भगवान को यह संकेत दिया जाता है कि पृथ्वी के लोग सुखी हैं। दूसरे कारण कुछ वैज्ञानिक है - पटाखों से जो आग निकलती है उससे कीड़े-मकौड़े और मच्छर मर जाते हैं जो वर्षा के बाद बढ़ जाते हैं।

यह समय दान और क्षमा का है
दिवाली के दिन हर किसी का गलती भूलकर माफ़ करने का समय होता है। पूरा वातावरण मुक्ति, उल्लास, त्योहार का आनंद और मित्रता के भाव से साराबोर होता है। दिवाली लोगों में एकता और दानशिलता का भाव भर देती है। हर कोई अपने बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदते हैं।

दिवाली का समारोह
हर कोई अपने घरों को साफ करता है और इलेक्ट्रिक लैंप से सजाता है जिससे पूरा घर जगमगा उठता है। देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। घर की औरतें सोने का गहना देवी के समक्ष रखती है और पूरे साल भर समृद्धि की कामना करती है। घर का मुख्य द्वार देवी लक्ष्मी के आगमन के लिए खुला रखा जाता है। दुकानदार और व्यापारीगण अपने नए बही-खातों की पूजा दिवाली के दिन करते हैं। गुजरात में इसको चोपडीपूजन कहते हैं। बहुत प्रकार की मिठाईयाँ बाँटी जाती हैं। कुछ सम्प्रदायों में मिठाई और नमकीन से भरी मिठाईयों का आदान-प्रदान किया जाता है।

बच्चे और बड़े मिलकर पटाखे जलाते हैं। इन दिनों कुछ पटाखे मिलते हैं जिससे आसमान जगमगा उठता है। अलग-अलग तरीके से पटाखें न जलाकर सब एक साथ एकत्र होकर जलाते हैं और कुछ लोग पटाखों को अच्छे तरीके से जलाकर सबको आनंद भी प्रदान करते हैं।

दिवाली लोगों के घरों और हृदयों में प्रकाश फैलाता है
यह सिर्फ प्रकाश का त्योहार नहीं है यह लोगों के दिलों में प्यार भी जगाता है, यह हमारे आत्मा के जड़ों को मिठास से भर देता है।

दिवाली के स्वादिष्ट व्यंजन

मिठाई और डेजट् किसी भी भारतीय त्योहार का दिल और आत्मा होता है यानि अभिन्न अंग होता है। दिवाली आते ही घर में ‘चलो मिठाई बनाने’ का नारा गूंजने लगता है! बेसन लड्डु, अनारसे और मोहनथाल यह तीनों मिठाई दिवाली में बनते ही है। काजू कटली तो व्यक्तिगत पसंद होता है, थोड़ा अलग हट कर बादाम कटली या ब्लूबेरी सैंडवीच कटली भी बना सकते है।

परम्परागत मिठाई में बहुत सारा फैट और शुगर होता है और अगर यह दिवाली की मिठाई है तो घर पर ही बनाया जाती है। जब आप यह मिठाईयाँ घर पर बनाते है तब यह बाज़ार में पाये जाने वाले मिठाईयों से हजार गुना अच्छा होता है क्योंकि एक तो यह स्वच्छता का ध्यान रख कर बनाया जाता है और दोस्तलोग भी इसको पसंद करते है। साथ ही अगर उपहार में अपनों का छुवन हो तो क्या कहनें!

आकर्षक उपहार का बॉक्स बनायें और रंगीन पेपर कपकेक होल्डर में विभिन्न प्रकार के लड्डु भरें। आप चोको कोकोनट लड्डु, ड्राई फ्रूट और खजूर का लड्डु, रवा लड्डु, बादामी बेसन के लड्डु बना सकते है और बूंदी का लड्डु भी अच्छा होता है!

त्योहार के दो-तीन दिन पहले गुजिया या करन्जी भी बना सकते है। हवाबंद जार में रख सकते हैं। इसी तरह मोहनथाल और बेसन का लड्डु भी बना सकते हैं। बूंदी का लड्डु एक दिन पहले बनाएं और जितनी जल्दी हो सके सबको बाँट दें या खपत कर दें। सभी खोया का बना बरफी रेफ़्रिजरेटर में रख कर संरक्षित कर सकते हैं। अगर चाहे तो जलेबी और गुलाब जामुन भी घर पर बना सकते हैं और गरमागरम परोस सकते हैं।

काजू कतली से बनी मिठाईयों की बहुत चर्चा होती है। आकार देने के लिए बेस बहुत अच्छा होता है जैसे - छोटा तरबूज़, सीताफल, भुट्ठा, कलश जो भी चाहे आकार दे सकते है। यह देखने में बहुत आकर्षक लगते हैं।

ड्राई फ्रूट कुछ समय के लिए फ्रिज के एक कोने में रखा जा सकता है। अगर मौसम कुछ ठंडा हो रहा है तो पिस्ता, आलमंड और काजू से ड्राई फ्रूट चिक्की बना सकते हैं। नमकीन में नमकीन शक्करपारे, चकली, मेथी मठरी, तीखी सेव, ननखटाई, छोलाफल्ली और चिवड़ा आदि दूसरे मनपसंद चीजें है जो त्योहार के मौसम में बहुत दिखते हैं।

बॉक्स में डालने के लिए घर की बनी दिवाली की क्या मिठाई होगी? यहाँ बहुत सारे मिठाईयों की सूची दी जा रही है आपको जो पसंद हो उसका चुनाव करें।

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MasterChef Sanjeev Kapoor

Chef Sanjeev Kapoor is the most celebrated face of Indian cuisine. He is Chef extraordinaire, runs a successful TV Channel FoodFood, hosted Khana Khazana cookery show on television for more than 17 years, author of 150+ best selling cookbooks, restaurateur and winner of several culinary awards. He is living his dream of making Indian cuisine the number one in the world and empowering women through power of cooking to become self sufficient. His recipe portal www.sanjeevkapoor.com is a complete cookery manual with a compendium of more than 10,000 tried & tested recipes, videos, articles, tips & trivia and a wealth of information on the art and craft of cooking in both English and Hindi.